Saturday, November 28, 2020
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पाली जिले के जैतपुरा में गुरू वल्लभ की मूर्ति का पीएम मोदी ने किया अनावरण.. ऑनल…

पाली जिले के जैतपुरा में गुरू वल्लभ की मूर्ति का पीएम मोदी ने किया अनावरण..

ऑनलाइन पाली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दोपहर 12 बजे पाली जिले के जेतपुरा में स्टेच्यू ऑफ पीस का अनावरण किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को पाली में जैन आचार्य विजय वल्लभ की प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ पीस' का वीडियो कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से अनावरण किया। महाराज सुरेश्वर जैन की 151वी जयंती पर मोदी ने विश्व शांति का संदेश दिया। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई पटेल की विश्व की सबसे ऊंची ‘स्टैचू ऑफ यूनिटी’ के लोकार्पण का अवसर दिया था, और आज जैनाचार्य विजय वल्लभ जी की भी ‘स्टैचू ऑफ पीस’ के अनावरण का सौभाग्य मुझे मिला है।

मोदी ने कहा, 'भारत ने हमेशा पूरे विश्व को, मानवता को, शांति, अहिंसा का मार्ग दिखाया है। ये वो संदेश हैं जिनकी प्रेरणा विश्व को भारत से मिलती है। इसी मार्गदर्शन के लिए दुनिया आज एक बार फिर भारत की ओर देख रही है। मुझे विश्वास है कि ये 'स्टेचू ऑफ पीस' विश्व मे शांति, अहिंसा और सेवा का एक प्रेरणा स्रोत बनेगी।'

'आप भारत का इतिहास देखें तो महसूस करेंगे, जब भी भारत को आंतरिक प्रकाश की जरूरत हुई है, संत परंपरा से कोई न कोई सूर्य उदय हुआ है। कोई न कोई बड़ा संत हर कालखंड में हमारे देश में रहा है, जिसने उस कालखंड को देखते हुए समाज को दिशा दी है। आचार्य विजय वल्लभ जी ऐसे ही संत थे।'

पीएम ने कहा, 'आज 21वीं सदी में मैं आचार्यों, संतों से एक आग्रह करना चाहता हूं कि जिस प्रकार आजादी के आंदोलन की पीठिका भक्ति आंदोलन से शुरू हुई। वैसे ही आत्मनिर्भर भारत की पीठिका तैयार करने का काम संतों, आचार्यों, महंतों का है। महापुरुषों का, संतों का विचार इसलिए अमर होता है, क्योंकि वो जो बताते हैं, वही अपने जीवन में जीते हैं। आचार्य विजय वल्लभ जी कहते थे कि साधु, महात्माओं का कर्तव्य है कि वो अज्ञान, कलह, बेगारी, आलस, व्यसन और समाज के बुरे रीति रिवाजों को दूर करने के लिए प्रयत्न करें।

उन्होंने कहा कि आचार्य जी के शिक्षण संस्थान आज एक उपवन की तरह हैं। सौ सालों से अधिक की इस यात्रा में कितने ही प्रतिभाशाली युवा इन संस्थानों से निकले हैं। कितने ही उद्योगपतियों, न्यायाधीशों, डॉक्टर्स, और इंजीनियर्स ने इन संस्थानों से निकलकर देश के लिए अभूतपूर्व योगदान किया है। स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में इन संस्थानों ने जो योगदान दिया है, देश आज उसका ऋणी हैं। उन्होंने उस कठिन समय में भी स्त्री शिक्षा की अलख जगाई। अनेक बालिकाश्रम स्थापित करवाए, और महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ा।







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